भोपाल. अदालतों में फर्जी जमानतदारों के बड़े रैकेट ऑपरेट हो रहे हैं। फर्जी ऋण पुस्तिका को अदालत में पेश कर हत्या तक के मामलों में भी जमानत भरने में उन्हें कोई परेशानी नहीं आती। इस बात पर उस वक्त मोहर लग गई, जब क्राइम ब्रांच ने ऐसे ही गिरोह की महिला सदस्य को गिरफ्तार किया। ये महिला कई साल से इस गोरखधंधे को अंजाम दे रही है। अब तक वह 250 से ज्यादा बदमाशों की जमानतें ले चुकी है। पुलिस को शक है कि कुछ वकीलों की मदद के बगैर ये गिरोह संचालित करना मुमकिन नहीं, जो इन्हें “न्यायमित्र” कहकर बुलाते हैं।
एएसपी निश्चल झारिया के मुताबिक जिला अदालत के बाहर नीले रंग की साड़ी पहने खड़ी महिला के बारे में पता चला था। जानकारी मिली थी कि वह फर्जी जमानतें लेने में जेल भी जा चुकी है। इस आधार पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। तलाशी में उसके पास से एक बही की फोटो कॉपी मिली, जो गेहूंखेड़ा स्थित जमीन की थी। एसडीएम कोर्ट से जब इस बही की तस्दीक करवाई गई तो वह फर्जी निकली। महिला ने खुलासा किया कि 22 फरवरी को उसने इसी बही के आधार पर सीजेएम कोर्ट में जमानत ली है। आरोपी को जमानत देने के लिए हाइकोर्ट ने सहमति दी थी। पकड़ी गई महिला गेहूंखेड़ा, कोलार निवासी 25 वर्षीय रश्मि कश्यप है, जो राशिदा नाम से भी फर्जी जमानतें ले चुकी है।
कोर्ट मुंशियों और क्लर्कों की मिलीभगत से चल रहा कारोबार
अदालत में फर्जी जमानत देने वाली महिलायें कोलार और हबीबगंज इलाके की झुग्गी में रहती है। इनके पास फर्जी बहियां याने ऋण पुस्तिका मौजूद है। ऋण पुस्तिका पर जमानत देने वाली महिला का फोटो और सरकारी सील सिक्के असली होने का अहसास दिलाते है। वास्तव में ये सभी ऋण पुस्तिका फर्जी तरीके से तैयार की गई है। ऋण पुस्तिका बनाने के लिये महिलाओं ने अपनी गैंग में दो युवकों को भी शामिल कर रखा है जो इन्हें तैयार करते है। कोर्ट मुंशियों और बाबू की मिलीभगत से फर्जी जमानत का कारोबार चल रहा है।
फर्जी जमानत के लिए वकील भी लेते थे मदद
एएसपी झारिया ने बताया कि हर जमानत करवाने पर इस महिला को दो हजार रुपए मिलते थे। ऐसे ही एक मामले में रश्मि की मां लक्ष्मी को बीती छह फरवरी को जेल भेजा गया था। रश्मि इससे पहले भी गिरफ्तार हो चुकी है। रश्मि के संपर्क में कई वकील भी हैं, जो फर्जी जमानत के लिए उसकी मदद लेते थे।
जज के सामने खड़े होने की कराते हैं रिहर्सल
पुलिस का दावा है कि जमानत भरने से पहले ऐसे गिरोह के सदस्य आरोपी के बारे में हर जानकारी हासिल करते हैं। ये जानकारी वही होती हैं, जिन्हें लेकर अमूमन अदालत में जज सवाल करते हैं। इसके बाद जमानतदार को जज द्वारा पूछे जाने वाले सवालों पर रिहर्सल भी करवाई जाती थी, ताकि अदालत में किसी तरह की कोई गड़बड़ी न हो जाए।
भोपाल जिला अदालत में सक्रिय हैं कई गिरोह
एमपी नगर पुलिस जुलाई 2018 में ऐसे ही एक गिरोह का खुलासा कर चुकी है। इस गिरोह के ज्यादातर सदस्यों की जमानत हो चुकी हैं। इन दिनों जिला अदालत में ऐसे फर्जी जमानतदारों को आते जाते देखा जा सकता है। अदालत के बाहर चाय की दुकान और ठेलों पर फर्जी जमानतदारों का जमावड़ा लगता है। सभी की नजर ऐसे लोगों पर होती हैं, जो जमानतदार के लिए परेशान हो रहे हों।
जमानतें निरस्त होंगी : एएसपी झारिया के मुताबिक आराेपियाें ने किन-किन लोगों की किन-किन अपराधों में जमानत भरी है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। इसके लिए इस्तेमाल की गई ऋण पुस्तिका की प्रति भी अदालत से ली जाएगी। इस जानकारी के आधार पर पुलिस उन आरोपियों की जमानतें निरस्त करवाएगी।